श्री गीता योग प्रकाश

स्व. श्री बिजय शंकर पाण्डेय द्वारा रचित

गीता का पदानुवाद


श्री जी डी पाण्डेय द्वारा संकलित

प्रस्तुतकर्ता

पुनम पाण्डेय
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श्री गीता योग प्रकाश - अध्याय 7

अध्याय-७

ज्ञान विज्ञान-योग


परमात्मा हैं नित्य और अविनाशी मायातीत।

पृथ्वी बायु अग्नि जल नभ, मन बुद्धि अहं पर‌तीति ॥

अपरा प्र‌कृति कहाती उनकी,परा प्रकृति है चेतन ।

इन दोनों से पैदा होते, सब प्राणी जड़ चेतन ॥136॥


सभी सृष्टि उत्पन्न व लय हो, परम प्रभू के कारण ।

संरचना सब गुथी हुई है, उनसे सदा अकारण ॥

जल में रस भी परम प्रभू हैं, रवि चन्द्र अग्नि में तेज।

नभ में शब्द, पुरुष में पराक्रम, वेदहिं “ॐ” सतेज ॥137॥